हम उस देश के वाशी है……….


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हम उस देश के वाशी है जिस देश में गंगा मैली है

हम उस देश के वाशी है जिस देश में काशी घाट भी गन्दा है

हम उस देश के वाशी है ,जिस जिस देश में पयेजो  की मंडी है

आप को बत्तते हुए मुझे ये सरम आएगी और आप को पढ़ते हुए की दुनिया में केवल तीन ही ऐसे देश है है थोपिया सोमलिया और भारत जहा मुर्दा बेचने का कानूनी अधिकार पाया जाता हैं यदि किसे के घर पर इतनी गरीबी है की मुर्दा बेच कर पेट भरता है तो ,साउथ-बिहार और उड़ीशा में ये मुर्दा बेचने का अधिकार है।”

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश में मुर्दाओ की भी मंडी लगती हैै

हम उस देश के वाशी है, जिस देश में अनुशाशन का पूरा दौर सिखंडी है

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश में आतंकियों का सम्मान हुआ

हम उस देश के वाशी है, जिस देश में करगिल के विधवाओ का अपमान हुआ।

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश मे अपराधियो का सम्मान हुआ।

हम उस देश के वाशी है ,जंहा लालू जैसे नेता जी महान हुये।

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश में गांधी का अपमान हुआ

हम उस देश के वाशी है, जिस देश मे,
आजादी के नायक शेखर को भी गाली दी जाती है

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश में आतंकवादियो को भी बिरयानी चिकन खिलाई जाती है

हम उस देश के वाशी है, जिस देश में डाकू ने खादी पहनी तो ताली दी जाती है

हम उस देश के वाशी है , जिस देश में उसका ही राष्ट्रगान सर्मिंदा है

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश मे, भारतमा को गली दे कर भी खलनायक जिन्दा है ,

और
अलगाववादी गिलानी अब भी जिन्दा है।

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश में निर्भया जैसे कांड हुआ

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश में साधू संतो का अपमान हुआ

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश में भूखे मरते है लाखो लोग

हम इस देश के वाशी है ,जिस देश में बेरोजगारी के कारन हाथो में बंदूके पकड़ते मासूम रोज

हम उस देश के वाशी है, जिस देश मे, हवस की नजरो से देखि जाने लगी है बहने रोज

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश की सुन्दरतम घाटी लहूलुहान हुयी

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश में फूलनदेवी भी सनसद प्रधान हुई

हम उस देश के वाशी है जिस देशमें झंडे फाडे जाते है

हम उस देश के वाशी जिस देश मे,1947 के घाव उखड़े जाते हैे

हम उस देश के वाशी है , जिस देश क बेटेे भारत के नहीं कहलाते है

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश के  बेटे घाटी में ही सरणार्थी हो जाते है ।

हम उस देश के वासी है ,जिस देश में , फाड़ा जाता है अपना तिरंगा।

हम उस देश के वाशी है ,जिस देश में ,रोज घाटी में लहराता हो पाकिस्तान का झंडा ।

हम उस देश के वासी है जिस देश में सत्ता के खातिर नाग और नेवले का गठबंधन हो जाता है

नागफनी और काँटों का वन चन्दन वन हो जाता है

हम उस देश के वासी है जिस देश मे, खुदगर्जी के कारन देशद्रोहियो को छोड़ा जाता है

सत्ता के खातिर मसरत अली जैसो को सरेआम जिन्दा छोड़ा जाता है

जो कालेधन हत्त्ययो दुष्कर्मो के आरोपी है ,
उनके ही सर पर आज नेहरू जी की टोपी है ।

इस कायर मतलबपरास्त राजनीत से मै बचपन से घबराता हूँ

इसीलिए मैं कविता  में अंगार लिए फिरता हूँ,

इसी लिए मैं आंसू से भींगा अख़बार लिए फिरता हूँ,

इसीलिए मै कविता को हथियार बना कर लिखता हूँ।

रामकिंकर दास त्रिपाठी ‘देव की कलम से

Ramkinkar dastripathi (cyber xpert )

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