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Vedio LOVE POEM |नशा तब का चढ़ा था जो ,अभी तक न उतर पाया |

1.  

यूँ आप मानती कँहा है हमारी बात ,
यूँ आप जानती कँहा है हमारे दिल के जज्बात ,

हम तो आप की यादो में रात रात भर नही सोते है ,
दिल को समझाते है  ,
फिर भी आपकी यादो में खो जाते है।।

2.

मै न दरिया हूँ न समंदर हूँ ,
न सूरज हूँ न अम्बर हूँ ,

ए ज़माने तूने कहा मुझे जुगनूं ,
मेरे यार ने कहा जुगनूं ,
तो मै जुगनूं भी सुन्दर हूँ ।।

3.

कुछ तो बात जरूर जरूर है तुझमे  ,
कुछ तो खास जरूर जरूर है तुझमे ,

वर्ना जो राम किसी लड़की को 
बहन के सिवा कुछ कहता नही  ,
तेरे लिए ये नगमे ये प्यार के शेर पढ़ता नही ।।

4.

मयखाने गया मै तो नशा बिलकुल न चढ़ पाया  ,
देखा है जब से तुझको नशा भरपूर है छाया ,

तूने मुड-मुड़ के देखता तो जो उन क्लासों में मुझको तो  ,
नशा तब का चढ़ा था जो ,अभी तक न उतर पाया  ।।

-Ramkinkar Das Tripathi

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सीख रहा हूँ !…..

Sometimes I write Poem just for no reason but for expressing my experience, feeling this poem is also one of them ………

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Life is Fight of oneself with oneself Be ready !! Be prepared !!
 
सीख रहा हूँ ,
मैं भी अब जिंदगी के उसूलो को
कुछ हँसना कुछ औरो को हँसाना ,
 
सीख रहा हूँ ,
पहचानना भी अब जिंदगी के रसूलो को
रोते हुए भी अपने को हँसते दिखाना ,
 
सीख रहा हूँ
बड़ी आसानी से खुद को खुदी से चुराना ,
बड़ी बेराह सी जिंदगी हो गयी है यारो ,
जाने ! क्यों किस लिए इतना भाग रहा हूँ ,
न जाने क्या खोना क्या पाना चाह रहा हूँ,
 
सीख रहा हूँ
माँ बाप से बड़ी आसानी से झूँठ बोल जाना ,
तरक्की के भ्रम में माँ बाप से दूर हो जाना,
 
सीख रहा हूँ
की बचपन ही काफी अच्छा था ,
जीवन काफी अच्छा था जब तक मैं बच्चा था,
 
सीख रहा हूँ
उन रिस्तो की अहमियत जो मिसाल थे ,
आज की तरह नही फसे थे इतने जाल में,
आज की तरह कभी नही फसे थे जाल से ,
 
सीख रहा हूँ
माँ की समता को,
निर्मल ,पवन सी उसकी सरस ममता को ,
उस ममता को जाने क्यों मैं तौलने लगा ,
जिंदगी में आधुनिकता क्या आई ,
न जाने क्यो उस ममता को भूलने लगा |
 
सीख रहा हूँ
सीखता हूँ तो और सिखाती है जिंदगी ,
लड़ता हूँ तो
और आगे ले के जाती है जिंदगी,
बेसक हारता हूँ हर बार मैं
इस जंग में जिंदगी से ,
पर हर हार में ,
कुछ न कुछ नया सिखाती है जिंदगी ।।

– Ramkinkar das tripathi

यादों के झारोंखे से अाज का सुनहरा यादगार दिन

यादों के झारोंखे से अाज का सुनहरा यादगार दिन

मैंने शेर पढ़ा बहुतो ने सुना सब ने दाद दी ,
   तेरी मुख से वाह आती तो बात कुछ और थी ,

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बात कँहा से प्रारंभ करूँ पता ही नही चल  रहा है मेरा साहित्यिक सफ़र ये बताता है की ऐसी परस्थितियाँ तभी आती है जब या तो आप काफी खुश हो याँ फिर काफी उदास हो खेर पहली वाली परस्थिति की बात करना उतनी प्रासंगिक न होगी जितनी की दूसरी और अगर आपके पास मेरे जैसे चिर महान उदारता और सागर के सामान कमीने दोस्त हो तो फिर दूसरी वाली परस्थिति भी अपने आप ही पहले वाली में परिवर्तिति हो जाती है ।खेर आज का दिन मेरे लिए एक महान दिन था क्योकि आज ही के दिन से मैंने इस संसार में अपनी माँ के प्रथम दृस्तिपात किया जिस माँ ने अपना जीवन को अर्पित कर दिया मेरे लिए नूतन सवेरे के लिए आज इस समय मै कंही न कंही उन्हें याद करके मेरा अंतर्मन रो सा पड़ा था।।क्यकी वो माँ आज भी इतने दूर होने पर भी मेरे उन्नति के लिए उसी तरह पंडितो के द्वारो पूजा करवा रही थी जैसा की जब मै होता हूँ ।।पर इन रोते हुए मन को उन्मुक्त और खुशियों की तरफ ले जाना का काम मेरे उन्ही सागर के सामान कमीने दोस्तों ने किया जो आज इस दिन को मेरे लिए ऐसा यादगार पल बनाया जो मेरे जिंदगी के कुछ सुनहरे पलो में से एक सा हो गया ।हालाँकि इसकी शुरुआत  मध्य रात से ही हो गयी थी जब मेरे दोस्त मुझे काफी दूर से आने लगे हालाँकि वो बात अलग थी की मार काफ़ी पड़ी और उसका दर्द अभी भी है क्योंकि हम इंजीनियर अगर सब की तरह वही cakes काट कर मोमबत्तियां बुझा दे तो फिर हम में और आम इंसानो के जन्मदिन मानाने में फ़र्क़ की क्या होगा आखिर हम इस दुनियाँ में सभी अविष्कारों के जन्मदाता है सो हमने अपने जन्मदिन मानाने एक अपना और सबसे अलग तरीका निकाल लिया और वो है जिस किसी भी मासूम बालक का जन्मदिन होता है उसको अपने जन्मदिन से ख़ुशी कम और दुःख जादा होता है क्योकि जिसका भी जन्मदिन होता है उसे मध्यरात्रि में अशंख्य और अनगिनत ब्रांडेड चप्पल ,जूतो और थप्पड़ों का बड़ी ही मासूमियत के साथ सहना पड़ता है लेकिन ये फिर एक ऐसी याद बनती है जिसका मैं क्या कोई भी इसे शब्दों से नही बता सकता ।सोशल मीडिया में काफी मित्रो की शुभकामनाओ ने मन को काफी प्रफुल्लित किया लेकिन दोस्त तो दोस्त ही होते है………

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&

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कमीनो ने आज के दिन भी नही छोड़ा।।मुझे काफी दोस्तों के कॉल्स आये और काफी ऐसे दोस्तों के कॉल्स भी आये जो की बिलकुल ही unexpected थे और येही छोटी छोटी खुशियो ने मिलकर इस दिन को एक सुनहरा पल बना दिया ।।

 

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GOT THE BEST GIFT OF THIS B’DAY

 

हालाँकि मैं अपने आप को औरो से  जादा न सही बस 10-20 gram जादा बुद्धिमान तो समझता ही हूँ पर हुआ कुछ उल्टा ही शाम के समय मेरा एक काफी मासूम सा दोस्त जिस कमीने को हम बड़े ही प्यार से सिगनल कहते है मेरे रूम में दस्तक दिए मै सो ही रहा था ।।मै भी तोड़ा जागृत ही हुआ था की भाई जी ने बड़े ही प्यार से बोला ”भाई वरुन का काल आया था बोला की राम को ले के आ जा नीचे” मैं उस समय नींद में ही था मैंने कहा हाँ चलता हूँ बस फिर face wash ही हुआ था की भाई जी ने फिर कहा यार जल्दी चल यार ,मैंने पूंछ किस लिया है तो भाई जी ऐसे ही यार (अच्छा बाद में पता चला तो मुझे लगा की की इतनी अच्छी एक्टिंग के लिए इसे ऑस्कर मिलना चाहिए )

सामान्यतः हमारी वरुन और सिगनल की डिबेट या कई सारी बाते शेयर होती रहती है सो मैंने सोचा ऐसे ही कुछ होगा और मौसम भी काफी अच्छा तो जादा मैंने पुंछ ही नही और पूंछता भी कैसे उसी समय मैं एक कॉल में व्यस्त हो गया
भाई जी : लगातार काल्स पर कॉल कर रहे थे और पूंछ रहे थे की कँहा हो
मैंने सोचा भाई जी वरुन से बात कर रहे होंगे लेकिन एक मिनट रुकिए !!

शॉप के फर्स्ट फ्लोर में मुझे क्यों ले जा रहा है ये सिगनल मैं ये समझता की इससे पहले ही मुझे कुछ लोग नजर आ गए बड़े ही खूंखार,डरावने और कमीने,
मै थोडा सा सहम सा गया लग रहा था ये कोई ग्रुप था हाँ जिसमे तीन से चार लड़कियाँ और ऐसे ही कुछ लड़के थे ,अरे हाँ सायद मै इनका नाम भी जानता हूँ

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अरे हाँ ये तो  भारती ,शीतल ,तनवी ,तौसिफ और सूरज है।।

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और हाँ मास्टरमाइंड रवि जी है मैं अभी ये सोच ही रहा था की HAPPY B’DAY TO YOU RAM की आवाज़ ने मुझे नींद से उठा दिया ।।और कुछ इस तरह से सिगनल पूरा ही नाम बता देता हूँ सो शुभम सिंगल ने और कुछ इस तरह से इन सभी के साथ मिलकर मेरे इस 10-20gram औरो से जादा बुद्धिमानता वाली बात को गलत साबित कर दिया ।।और कुछ इस तरह से ये दिन मेरे लिए एक यादगार बना दिया ।।

आगे भी काफी कुछ हुआ और बहुत कुछ होना अभी बाकि है जैसे की मुझे पार्टी देनी है….लेकिन इस ख़ुशी ,इस प्यार,इस लगाव के लिए दिल से धन्यवाद देना चाहता हूँ सभी को जिन्होंने एक छोटे से दिन को मेरे लिए सुनहरे पल में तब्दील कर दिया ।।

बेटियाँ

मेरे घर में एक नन्ही परी ने जन्म लिए तो उसके लिए कुछ लाइने दिल से ………

नन्ही परी

बेटियां  ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान ,

ये तो संसार की हर संपत्ति से भी महान है ,

देख कर बेटियो का नूरखुदा को भी खुद पर तरस आ जाता है ,

कि काश वो भी कुछ पल  बेटियोके साथ भी  बिता पाता ।।

अपने नूर से ये रोशन करती है   अंधकार में डूबे हुये खंडहरो को ,

अपने प्रताप से ये कम करती है हरेक बाधा के मंजरों को ॥

हमेशा समर्पण का भाव हो जिनमे ऐसी ये मोतियाँ है ,

पिता के स्वाभिमान में चोट आने न पाये ऐसी ही ये बेटीयाँ है ।।

    हो अगर बेटियाँ घर मेंभूँखा मेहमान नही जा सकता है,

हो कितनी भी रुष्ठ पिता से ,

पर पिता  के प्रति उनका सम्मान नही जा सकता है

हर जगह खरी उतरती है किस्मत की कसौटियों पर । 

बखूभी निभाती हैअपना किरदारमाँ ,बहन ,बेटी बन कर ।।

Ramkinkardastripathi 

Love Poem Teri Khubsoorti ko kya naam dun

प्यार के कुछ नवीन मुक्तक ……….

1.
हजारो लुट गए लाखो तैयार बैठे है ,
कुछ की बारी आ गयी कुछ अपने इंतज़ार में बैठे है ,

ये इश्क है दोस्तों दरिया में डूबने का अपना अलग ही मजा है ,
कुछ डूब चुके है कुछ डूबने के इंतज़ार में बैठे है ।।

2.
तेरी हंसी दिल से उतरती नही ,
कील लगती है लेकिन चुभती नही ,
किये होंगे लाखो पूण्य यँहा पे मैंने ,
पर क्या करूँ ! तुझ जैसी कोई और मिलती नही ।।

3.
तेरी खूबसूरती को क्या नाम दूँ ,
तेरी इस खिलखिलाती हंसी को क्या पहचान दूँ,
तूने जब मुश्कुरा के देखा था न मुझे उस दिन ,
मै घायल हो गया था ,तू ही बता इस घाव को क्या नाम दूँ ।।

– Ramkinkar das tripathi

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