Love Poem Teri Khubsoorti ko kya naam dun

प्यार के कुछ नवीन मुक्तक ……….

1.
हजारो लुट गए लाखो तैयार बैठे है ,
कुछ की बारी आ गयी कुछ अपने इंतज़ार में बैठे है ,

ये इश्क है दोस्तों दरिया में डूबने का अपना अलग ही मजा है ,
कुछ डूब चुके है कुछ डूबने के इंतज़ार में बैठे है ।।

2.
तेरी हंसी दिल से उतरती नही ,
कील लगती है लेकिन चुभती नही ,
किये होंगे लाखो पूण्य यँहा पे मैंने ,
पर क्या करूँ ! तुझ जैसी कोई और मिलती नही ।।

3.
तेरी खूबसूरती को क्या नाम दूँ ,
तेरी इस खिलखिलाती हंसी को क्या पहचान दूँ,
तूने जब मुश्कुरा के देखा था न मुझे उस दिन ,
मै घायल हो गया था ,तू ही बता इस घाव को क्या नाम दूँ ।।

– Ramkinkar das tripathi

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पाकिस्तान द्वारा शहीद के शव को विकृत करने वाले आतंकवादियो पर मेरी नई कविता,

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शहीद मंजीत सिंह का शव आतंकियों ने विकृत कर दिया था……..

आज फिर फिर जात दिखादि है
कायर की औलादो ने ,
फिर वीरो का शव किया है विकृत
इन आतंकी प्यादों ने ,

कैसे दीप जलेंगे उन वीरो के अगन में ,
कैसे रोके होंगे आँसू उस माँ ने अपने  दामन में ,

मानव अधिकारो की बात है जो करते
अब मुँह छुपा के बैठे है ,
पता नही क्यूँ वो पाकिस्तान को अपना बाप समझ के बेठे है ,
क्या उस सैनिक का कोई अधिकार नही,
क्या उसका कोई मानवाधिकार नही ।।

कब तक जबानी मुह-तोड़ जवाब दिए जायेंगे
कब तक ये नेता जंग जबानी करवाएँगे ,

कुछ तो करना होगा
सिर्फ जुबान से काम नही होगा,
एक के बदले 10 मार लिए
सिर्फ इससे वीरो का सम्मान नही होगा।।

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एक शहीद पायलट की बेटी गृहमंत्री से यही पूंछ रही थी की आखिर सर इतना पुराना प्लेन चलने को क्यों दिया गया था इसका जवाब न तो राजनाथ सिंह दे पाये और न ही कोई और वँहा से लाइने उठाई है …….

पूंछ रही थी बेटी आखिर हर बार सैनिक का घर ही क्यों रोता है ,
क्यों आतंकी पैर पसार हमारे घर में जिन्दा सोता है ,
कुत्ते बिल्ली नही सिंहनी का दूध पिया है हमने ,
मिट्टी के नही जिन्दा सिंहो संग खेला है हमने ,

फिर भी हर बार छला जाता है देश अपने ही बेटो से ,
अपना इमान बेच चुके कुछ किस्मत के हेटो से ,
इन सब षड्यंत्रो का मिटना बहुत जरुरी है,
पहले घर के जाहिलो का मरना बहुत
जरुरी है ,

महाभारत में एक जगह प्रसंग आया है की 100वी गाली में कृष्ण ने शिशुपाल का वध कर दिया था….उसी तरह पाकिस्तान भी सौवीं गाली की सीमा रेखा कब की पार कर चुका है बस पाकिस्तान रुपी शिशुपाल को इंतज़ार है कृष्ण के प्रहार का

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Jai Hind

माफ़ किया है हमने क्षमा दान बहुत दे डाला है ,
अंजाने में ही शिशुपाल का मनोबल ऊँचा कर डाला है ,
सौवीं गाली कब की हो गयी उठो कृष्ण संधान करो ,
दुनिया के मानचित्र से विलुप्त पाकिस्तान करो||
Ramkinkar das Tripathi
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विजयदशमी पर मेरी कुछ चंद लाइने

कुछ जलने दो अपने
भीतर के तिमिर संसार को ,
कुछ जलने दो रावण जैसे व्यवहार को,

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कुछ सीखो रावण जैसे ज्ञानी से ,
वो भी पथभ्रमित हो सकता है ,

अभिमान किसी को हुआ तो फिर ,
वो प्रकांड ज्ञान भी
काम नही आ सकता है,

अभिमान पर स्वाभिमान की
जीत हमेशा होती है ,
रावण कितना भी बलसाली हो
सत्य राम की जीत हमेशा होती ।।
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भारत द्वारा पाकिस्तान पर किये #सर्जिकल स्ट्राइक पर मेरी कविता

आज भारतीय सेना के द्वारा #SurgicalStrikes(लक्ष्यभेदी हमला) करके पाकिस्तान को उसके घर में जा कर मारा ।जब मैंने ये न्यूज़ पढ़ी तब ख़ुशी में कुछ लाइने अनायास ही
निकल पड़ी ……

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We the People of India Proud On Indian Army

तुरंत जहन्नुम पँहुचा दो ,इन जिन्ना के बेटो को ,
श्मशान बना दो आतंकों के इन ठेको को
चुन चुन कर मारो इन किस्मत के हेटो को,

दुनिया से नाम मिटा दो इन आतंकी बाप के बेटो को,

सेना को खुली छूट दे दो,
अबकी बार तो रण चंडी का आवाह्न करो ,

नाग ,त्रिशूल ,पृथ्वी को क्यों रखे हो इनका भी संधान करो,

बहुत हुआ है भारत माँ का अपमान है ,
बहुत हुआ है इन दुष्टो का सम्मान है ,

अगली 2 लाइन भारत प्रधानमंत्री के लिए है ..!

खुला हाथ है शेरो का अब तो बंद नही करना तुम,

शांति शांति वार्ता का छंद नही पढ़ना अब तुम ।।

Jai Hind 💪
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मेरी बहन पर मेरी एक छोटी कविता

मेरी बहन पर मेरी एक छोटी कविता

संसार की उन तमाम बहनो के लिए जो भाईयो के लये अनगिनत दुआएँ करती ही रहती है ।मेरी छोटी से कविता से प्रणाम करता हूँ।

कौन सा छंद लिंखू ए बहन तेरे लिए ,
कौन सा गीत लिंखू ए बहन तेरे लिए ,
तू मेरे छन्दों की ,गीतो की शब्दसः बोली है ,
मेरी हर खुशियो की तू ही तो रंगोली है ,

तेरे बिना न पता ये मेरा खुशनुमा बचपन,
खट्टा मीठा ये अल्हड रंगीन सा अपनापन,
तूने ही तो चलना सिखलाया था मुझे,
गिर के उठाना कैसे है समझाया था तूने ही

तू न होती तो सायद मै अधूरा था,
तेरे बिना तो मै कभी पूरा न था ,
तू मेरे लिए अपने स्वप्नों को भूल गयी
मै आगे बढ़ जाऊँ तू पढ़ाई तक छोंड गयी,

कैसे -कैसे !ये कर्ज तेरा मै चुकलुँगा ,
दुआ करता हूँ ईस्वर से अगले जन्म में  ,
तुझे ही तुझे ही ए बहन  पाऊँगा ।।

“आपका एक भाई”
Ramkinkar das Tripathi
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पथिक

पथिक
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पथिक हूँ चलना हमारा नाम है ,
बाधाओ से लड़ना हमारा काम है ,
जिंदगी भी एक पथिक ही है दोस्तों
इस जिंदगी में आगे बढना हमारा काम है।।

सफलता या असफलता में भी बढना हमारा काम है ,
पथिक है जिंदगी के आगे चलना हमारा काम है ,
रुकना,थकना तो असफलता की निसानी है,
और असफलता किसको रास आनी है ।

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पथिक है जिंदगी के चलना हमारा नाम है
आगे बढना ,असफलताओ से न डरना हमारा काम है ,

एक असफलता हज़ार सफलता की निसानी है ,
बिना प्रयास किये सफलता की आस नादानी है,

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एक सफलता हजार असफलता की पहचान है ,
जिंदगी में अपनी पहचान के बिना भी क्या शान है ,
पथिक है हम जिंदगी के चलना हमारा काम है ,
पथिक है हम जिंदगी के चलना हमारा नाम है ।।

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Again Jai Hind

मुझे इंसान क्यों नही दिखता

बहुत दिनों की यात्रा में एक छोटी सी अपने मनोभावों के विचारो को कुछ पंक्तियों में सजोया है शायद आपके भी दिल की यही आवाज़ हो …….

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Kavi Ramkinkar das tripathi

मुझे इंसान क्यों नही दीखता ,

मुझे वो तिलक टोपी में खड़ा  ,
हिन्दू या मुसलमान क्यों दिखता है।

मुझे वो इंसान क्यों नही दिखता है ,

मुझेें योगी में भाई और ओवैसी में भाईजान क्यों दिखता है

मुझे हरेक इंसान नफ़रत से सना श्मशान क्यों दीखता है ,

मेरे मन से रामायण और कुरान के लिए अपमान क्यों निकलता है ,

मुझे हरेक कोई हिन्दू या मुसलमान क्यों दिखता है

मुझे इंसान क्यों नही दिखता है ,

मुझे वो बलात्कारी संत महान क्यों दीखता है ,

मुझे वो जाहिल कठमुल्ले अपने सामान क्यों दिखता है
 
इन्हे बचाने में अपने कौम का सम्मान क्यों दिखता है

मुझे इंसान क्यों नही दीखता

हिन्दू हूँ तो मुस्लिम दुश्मन सामान क्यों दिखता है,

मुस्लिम हूँ तो हिन्दू से जलने में इमान क्यों दिखता है ,

मुझे इंसान क्यों नही दीखता

जब कहते हो एक खुदा ने बनाई धरती,
तो फिर उसमे इमान क्यों नही रहता,

मुझे इंसान में इंसान क्यों नही दिखता ।।
Kavi Ramkinkar das tripathi
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